: कुछ इस तरह से
वो वारदात करता है,
लवों से कुछ नहीं कहता आखों से बात करता है,
मुझे बहार और पतझड़ का क्या करना
फूल झडते हैं जब वो बात करता है
मुझे घनघोर अँधेरो की जरूरत क्या है
वो ज़ुल्फे खोलकर शाम को रात करता है
उसकी दगाबाजी पे यकीं करना मुश्किल होगा
साथ में रहता है
मुस्कुरा के घात करता है
यूँ तो बातें हजार करनी है मुझको
मैं उसे देखता रह जाता हूँ जब वो मुलाकात करता है
-केशव
[30/01, 7:02 pm] Abhishek Mishra:
कहीं मैं हूँ कहीं वो है
कहीं मेरा फ़साना है
जिसे मैं गुनगुनाता हूँ
वही तेरा तराना है।।
कभी आना हमारे मन की,
थोड़ी सी व्यथा सुनना
तुम्हे महसूस भी होगा
वाह रे क्या ज़माना है।।
स्वरचित,
अभिषेक मिश्रा
[30/01, 7:02 pm] Abhishek Mishra: कौन कहता है कि मैं गम में बिखर जाऊंगा
इश्क जो होगा तो शायद ही मै मर जाऊंगा
अब मुझे अपने दुआओं से नवाजो यारों!
छोड़ कर तुमको बताओ मैं किधर जाऊंगा ।
वो वारदात करता है,
लवों से कुछ नहीं कहता आखों से बात करता है,
मुझे बहार और पतझड़ का क्या करना
फूल झडते हैं जब वो बात करता है
मुझे घनघोर अँधेरो की जरूरत क्या है
वो ज़ुल्फे खोलकर शाम को रात करता है
उसकी दगाबाजी पे यकीं करना मुश्किल होगा
साथ में रहता है
मुस्कुरा के घात करता है
यूँ तो बातें हजार करनी है मुझको
मैं उसे देखता रह जाता हूँ जब वो मुलाकात करता है
-केशव
[30/01, 7:02 pm] Abhishek Mishra:
कहीं मैं हूँ कहीं वो है
कहीं मेरा फ़साना है
जिसे मैं गुनगुनाता हूँ
वही तेरा तराना है।।
कभी आना हमारे मन की,
थोड़ी सी व्यथा सुनना
तुम्हे महसूस भी होगा
वाह रे क्या ज़माना है।।
स्वरचित,
अभिषेक मिश्रा
[30/01, 7:02 pm] Abhishek Mishra: कौन कहता है कि मैं गम में बिखर जाऊंगा
इश्क जो होगा तो शायद ही मै मर जाऊंगा
अब मुझे अपने दुआओं से नवाजो यारों!
छोड़ कर तुमको बताओ मैं किधर जाऊंगा ।