Monday, July 20, 2020

शब्द मिलते रहे गीत लिखता रहा
इस तरह दर्द कागज से लिपटा रहा
हादसों में गुजारी है सारी उमर
फिर भी कट न सका जिन्दगी का सफर
 भावना मिट गयी अर्थ बिकता रहा
शब्द मिलते रहे गीत लिखता रहा
साजिशें करते करते मेरे हमसफ़र
लूट लेते हैं दिल बनके वो रहगुजर
 आह भरते रहे दर्द होता रहा
शब्द मिलते रहे गीत लिखता रहा
ख्वाहिशें जिन्दगी भर खतम न हुई
मर गये जो मुहब्बत तो कम न हुई
अश्क गिरते रहे गम उठाता रहा
शब्द मिलते रहे गीत लिखता रहा
मैंने मिलकर खुदा से दुआ मांग ली
कितनी हैरत है तुमसे वफा मांग ली
जख्म मिलता रहा कष्ट होता रहा
केशव पण्डित

Saturday, May 2, 2020

तमाशा बना लिया है खुद के दर्द-ओ-गम का
अब तो खुद से खुद का लुत्फ़ उठा लेता हूँ 
तमाशा बना लिया है खुद के दर्द-ओ-गम का
अब तो खुद से खुद का लुत्फ़ उठा लेता हूँ 

Wednesday, April 29, 2020

तू मुझे महसूस कर

: कुछ इस तरह से
 वो वारदात करता है,
लवों से कुछ नहीं कहता आखों से बात करता है,
मुझे बहार और पतझड़ का क्या करना
फूल झडते हैं जब वो बात करता है
मुझे घनघोर अँधेरो की जरूरत क्या है
वो ज़ुल्फे खोलकर शाम को रात करता है
उसकी दगाबाजी पे यकीं करना मुश्किल होगा
साथ में रहता है
मुस्कुरा के घात करता है
यूँ तो बातें हजार करनी है मुझको
मैं उसे देखता रह जाता हूँ जब वो मुलाकात करता है
-केशव
[30/01, 7:02 pm] Abhishek Mishra:
 कहीं मैं हूँ कहीं वो है
कहीं मेरा फ़साना है
जिसे मैं गुनगुनाता हूँ
वही तेरा तराना है।।
कभी आना हमारे मन की,
थोड़ी सी व्यथा सुनना
तुम्हे महसूस भी होगा
वाह रे क्या ज़माना है।।
स्वरचित,
अभिषेक मिश्रा

[30/01, 7:02 pm] Abhishek Mishra: कौन कहता है कि मैं गम में बिखर जाऊंगा
इश्क जो होगा तो शायद ही मै मर जाऊंगा
अब मुझे अपने दुआओं से नवाजो यारों!
छोड़ कर तुमको बताओ मैं किधर जाऊंगा ।