प्रेम एक यात्रा

'प्रेम एक यात्रा' एक उपन्यास जो मैं आपके समक्ष प्रस्तुत करने जा रहा हूं भूमिका : वैसे तो जिन्दगी बहुत कुछ सीखा देती है मगर वो..... हा, याद आया जिसकी आँखों में दया और करुणा कि अर्ज है.. वो प्रेम कि देवी तितलियों के शहर से आई थी.. इस जिंदिगी को जिन्दगी देने.... लेकिन फिर वो झिझक, वो तडप, जानते हो बाद में वो मेरे लिए क्या छोडकर गई ? जानने के लिए पढ़े मेरा उपन्यास "प्रेम एक यात्रा" अभिषेक मिश्र 'भास्कर'

Saturday, May 2, 2020

तमाशा बना लिया है खुद के दर्द-ओ-गम का
अब तो खुद से खुद का लुत्फ़ उठा लेता हूँ 
Posted by प्रेम एक यात्रा at 5:36 PM No comments:
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तमाशा बना लिया है खुद के दर्द-ओ-गम का
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