'प्रेम एक यात्रा' एक उपन्यास जो मैं आपके समक्ष प्रस्तुत करने जा रहा हूं भूमिका : वैसे तो जिन्दगी बहुत कुछ सीखा देती है मगर वो..... हा, याद आया जिसकी आँखों में दया और करुणा कि अर्ज है.. वो प्रेम कि देवी तितलियों के शहर से आई थी.. इस जिंदिगी को जिन्दगी देने.... लेकिन फिर वो झिझक, वो तडप, जानते हो बाद में वो मेरे लिए क्या छोडकर गई ? जानने के लिए पढ़े मेरा उपन्यास "प्रेम एक यात्रा" अभिषेक मिश्र 'भास्कर'
Thursday, September 8, 2022
हमारे देश में आज भी ये परिवेश है, लाचारी है,बीमारी है, राग है द्वेष है, इसे कर्मो का बंधन कहें या कहें भाग्य का खेल गरीबी दुनिया का सबसे बड़ा क्लेश है! हमारे देश में आज भी ये परिवेश है!! बस बेबसी,और बेकसी में रहता है आदमी हाथों के छालों पैर की बेवाइयों को देखता है आदमी, उदासी है, मायूसी है, मगर जीवन शेष है, हमारे देश में आज भी ये परिवेश है!! रो पड़ेगा ये आंगन धरा ये गगन आह निकलेगी, खूं निकलेगा क्षुब्ध होगा मन, धोका है,फरेब है, मतलबी अशेष है, हमारे देश में आज भी ये परिवेश है!! अभिषेक मिश्रा
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